वुहान से फ्लाइट के उड़ते ही छात्रों की उदासी खुशी में बदली, वापस आने पर आइसोलेशन के 10 दिन जेल की तरह बीते: डॉ. पुलीन गुप्ता

By | February 23, 2020

नई दिल्ली.चीन में कोरोना वायरस के तेजी से फैलते संक्रमण के बीच वुहान से छात्रों को एयरलिफ्ट करने का अभियान आसान नहीं था। वहां फंसे भारतीय खौफ में थे। सबसे पहले 31 जनवरी को वुहान से छात्रों को लाने के लिए एयर इंडिया का प्लेन गया। वुहान से लोगों को सही सलामत लाने की जिम्मेदारी राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉक्टरों की टीम पर थी। प्लेन में डॉक्टरों के अलावा एयर इंडिया के 36 क्रू मेंबर थे। डॉक्टरों की टीम को लीड कर रहे थे अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. पुलीन गुप्ता। वुहान जाने और वहां से छात्र सहित 324 लोगों को वापस लाने के इस बेहद चुनौतीपूर्ण अभियान को डॉ. पुलीन गुप्ता ने भास्कर संवाददातातरुण सिसोदिया से साझा किया।

वुहान जाने की 5 दिन पहले मिली जानकारी, मन में डर था, बेटी ने बढ़ाया साहस, कहा कि आप जाइए

वुहान में फंसे छात्रों को भारत वापस लाने के लिए हम 31 जनवरी, 2020 को गए थे। हमें वहां जाना है, इसकी जानकारी 5 दिन पहले सरकार की ओर से दी गई। मन में डर था, परिवार भी डरा हुआ था। मगर मेरी मां, बड़ी बेटी तृषा और मेरी पत्नी डॉ. अनायिता ने मेरा साहस बढ़ाया और कहा कि आप जाइए। यह सिर्फ ड्यूटी नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी है। परिवार का साथ मिला तो टीम के साथ खुशी-खुशी गया। हमें बताया गया था वुहान से करीब छात्र सहित 200 लोगों को लेकर आना है। मगर वहां पहुंचे तो 324 लोगों को लेकर आए। हमारे सामने चैलेंज था कि मेडिकल स्टाफ और एयर इंडिया के क्रू मेंबर सही सलामत बिना इंफेक्शन के वापस आएं। इसके लिए हमने पूरी तैयारी की थी। फ्लाइट में मौजूद सभी लोगों को पूरा शरीर कवर करने वाला गाउन और मास्क दिया गया था। इसके अलावा जरूरी इमरजेंसी ड्रग्स भी हम साथ लेकर गए थे ताकि जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल कर सकें।

पूरा वुहान शहर रोशनी से सराबोर था मगर सड़कें सूनी पड़ी थीं
डॉ. गुप्ता ने बताया कि फ्लाइट से वुहान पहुंचने वाले थे तो ऊपर से पूरा शहर दिख रहा था। लाइटें जल रही थीं, लेकिन सड़कें सुनसान थीं। हम एयरपोर्ट पर पहुंचे तो चाइनीज अथॉरिटी ने कहा कि जब तक प्लेन नहीं आएगा स्टूडेंट को नहीं आने देंगे। हमने भारतीय एंबेसी से कॉन्टेक्ट किया, तब वह छात्रों को लेकर आए। 200-300 किलोमीटर दूर तक से छात्रों को लेकर आया गया। 5-6 घंटे वहां हमें रुकना पड़ा।

एयरपोर्ट पर छात्रों की जांच की गई, हाथ साफ कराए
उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट पर छात्र पहुंचने शुरू हुए तो जांच की, सेनेटाइजर से हाथ साफ कराए, मास्क दिए। एक-एक करके फ्लाइट में उन्हें भेजा। छात्रों की आंखों में आंसू थे। फ्लाइट उड़ते के साथ ही उनकी उदासी खुशी में बदल गई। छात्रों के बैठते ही भारत माता की जय, जय हिंद के नारे छात्रों ने लगाए। एक व्यक्ति ऐसे थे जिनकी वाइफ प्रेगनेंट थी, पांच साल की बेटी थी। उन्होंने मेरे पैर पकड़ लिए और रोने लगे। बोले आपने हमें बचा लिया।

2 बार टेस्ट निगेटिव आने के बाद सभी छात्र अपने घर गए

डॉ. गुप्ता ने बताया कि छात्रों को चीन के वुहान शहर से वापस लाने के बाद मुझे घर पर ही 10 दिन आइसोलेशन में रहना पड़ा। जाने से पांच दिन पहले भी परिवार से अलग था। वापस आने के बाद आइसोलेशन के दौरान मेरी तबीयत खराब हुई। बुखार हुआ, खांसी भी हुई। इससे मन में थोड़ा संदेह हुआ कि कहीं इंफेक्शन तो नहीं हो गया। डर यह भी था कि परिवार को इंफेक्शन न हो जाए। यह वक्त बहुत खराब गुजरा। परिवार के लोगों से कमरे के बाहर से ही बात होती थी। खाने के बर्तन अलग थे। ऐसा महसूस होने लगा था कि घर के अंदर ही जेल हो गई हो। कई बार रात में नींद नहीं आई थी। इस सबके बावजूद खुशी थी कि देश के लिए बड़ा काम किया। मुझे खुशी है कि ड्यूटी को अच्छे से निर्वाह किया। खुशी यह भी है कि सभी छात्र अपने घर जा चुके हैं क्योंकि दो बार टेस्ट निगेटिव आया है। अब वह ठीक हैं। हमें खुशी है कि जिस मिशन पर हम गए थे वह सफल रहा।

ये है डॉक्टरों की टीम जो वुहान गई थी

सभी छात्रों को लाने के लिए चीन के वुहान शहर गई टीम में इंटरनल मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. पुलीन गुप्ता, इसी विभाग के डॉ. आनंद विशाल, कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के डॉ. संजीत पनेसर के अलावा दो नर्सिंग स्टॉफ अजय जोस और शरद प्रेम शामिल थे।

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डॉ. पुलीन गुप्ता।

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